संदेश

एक मुस्कुराहट

आज यात्रा के लिए स्टेशन पर था ,सभी लोगों के तरीके मैं भी एक कोने में बैठा अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहा था | इस मोबाइल युग में मैं भी अपने फोन में टिक टिक कर रहा था , तभी एक मासूम सी बच...

बुजुर्ग एक अमूल्य धन

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सभी मित्रों को नमस्कार 🙏 कैसे हैं आप सभी.? उम्मीद है आप सभी खुश होंगे । आज के शुरूआती लेख में मै पूर्वजो में संचित बहुमूल्य अकूत ज्ञान एवं उनसे बात का एक अंश साझा कर रहा हूँ। .... हर शनिवार की भांति आज भी मै अपने दादा - दादी से मिलने पहुँचा , पूर्व की तरह जैसे ही उन्होने मुझे देखा उनके चेहरे प्रफुलित हो गये। हो भी क्यो ना ..उनका अपनापन जो दिख गया था। यही अमिट जुडाव है जो मुझे उनसे मिलने के लिए हर पल लालायित करता है । हाल चाल पूछा ही गया था कि उसके तुरंत बाद दादी ने बड़ी व्याकुलता से अपने पैरों के दर्द के बारे में मुझे बताया , मैंने उनसे यह बुढ़ापे का स्वाभाविक गुण बताया , उनकी प्रतिक्रिया ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया कि यह सब हाल के वर्षों में दूषित सब्जियों एवं खानपान का परिणाम है साथ ही उन्होंने इस पर आज की पीढ़ी पर पड़ने वाले स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों पर एक-एक करके विस्तृत विवरण सामने रख दिया एवं लगे हाथ अस्तित्व विहीन हो चुके मोटे अनाजों ( ज्वार, बाजरा की रोटी) एवं शुद्धता से की जाने वाली कृषि का संपूर्ण विवरण समझा दिया। इसके पूर्व भी जब भी मैं दादा दादी के साथ बैठता तब भी ऐसे ...

##Me too

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मी टू कैम्पेन -  कैसे भी हो , कितने समय बाद ही क्यों ना हो , 90के दशक का यह अभियान महिलाओं पर हुये अक्ष्मनीय शोषण को खुलकर दिशा देने मे कारगर जरूर हो रहा है , साथ ही शोषित महिलाओं को भी अपनी आन्तरिक दर्द को बाहर निकालने को पर्ेरित कर रहा है | काश एेसे अभियान की शुरूआत वैदिक काल ,बुद्ध ,जैन ,मौर्य ,मौर्योंत्तर ,मुगल काल ; वही बाह्य विश्व मे कैथोलिक चर्च के शासन काल से हुयी होती तो आज हमारा महिलाओं का अतीत अंधकार का ना होता | खैर लम्बे अर्शे बाद बौद्धिक चेतना के कारण ही सही  महिलाएं ने  स्वयं ही शोषण के खिलाफ आवाज  तो बुलंद किया | शीशा कितना चमकदार था वह अब देखने मिल रहा है , नामी हस्तियों के  चेहरे  के पीछे भी एक  चेहरा होता है ,वर्तमान संदर्भ मे इससे इंकार तो कतिपय नही किया जा सकता , इसी क्रम मे  एक केन्द्रीय मंत्री m j akbar का नाम लेना उचित होगा ,जिन पर 1 नही 11 महिलाओं ने शोषण का आरोप लगाया है , इनको पिछले संसद सत्र मे ट्रिपल तलाक पर बोलते हुए सुना है , स्पष्ट है की बाहरी व आंतरिक चरित्र मे काफी अंतर होता है , एक सवाल तो सरकार पर भी उठाना वाजिब...

Fifa world cup -2018

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क्रोएशिया 40लाख की आबादी वाला एक छोटा सा पूर्वी यूरोपीय देश फुटबॉल वर्ल्ड कप 2018 के फाइनल मे फर्ांस के सामने मौजूद है | प ़ यूरोपीय देश जहाँ तकनीकी , आर्थिक ,फैन फालोइंग सभी मामले मे धनी है , वहीं क्रोएशिया इन सभी मामलों मे नगण्य है | फीफा शुरू होने से पहले सभी फुटबाली दिग्गज बडी -बडी टीमों ( जर्मनी ,बर्ाजील ) की भविष्यवाणी कर रहे थे , क्रोएशिया पर किसी की नजर भी नही गयी | संसाधनो के स्तर पर इसके पास बडा एकेडमी भी नही है ,इसके खिलाड़ी युगोस्लाविया के एकेडमी का उपयोग करते है ,सराहना इनकी महिला राष्ट्रपति की भी करनी होगी जो दर्शकदीर्घा पर आमलोगो की तरह अपनी टीम का पर्ोत्साहन कर रही थी |....उम्मीद है सामूहिक मनोयोग वाली रोल माडल बनी क्रोएशिया टीम फाइनल जीतकर विश्व के सामने प्रेरणा का स्रोत जरूर बनेगी |.......I SUPPORT CROATIA.